🍚 बच्चे के अन्नप्राशन के लिए कौन सी तारीख शुभ है?

Annaprashan Muhurat • वास्तविक ग्रह-स्थितियों से गणना

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अन्नप्राशन — पहला अन्न — परंपरा से लड़कों के सम महीनों (प्रायः छठे) और लड़कियों के विषम (पाँचवें/सातवें) महीने में होता है: पुष्य, रोहिणी या तीनों उत्तरा जैसे पोषक नक्षत्र में, शुभ तिथि या पूर्णिमा पर।

आगामी शुभ तिथियाँ (अगले 60 दिन)

सामान्य पंचांग के अनुसार — आपकी व्यक्तिगत परत से पहले। नीचे राशि चुनें, ताकि जो दिन विशेषतः आपके लिए अनुकूल नहीं हैं वे हट जाएँ।

तारीखतिथिनक्षत्रतिथि समाप्ति
बुध, 9 सित॰Krishna TrayodashiAshlesha12:32
रवि, 13 सित॰Shukla DwitiyaHasta07:10
सोम, 14 सित॰Shukla TritiyaChitra07:08
सोम, 21 सित॰Shukla DashamiUttara Ashadha20:02
गुरु, 1 अक्टू॰Krishna PanchamiRohini12:36
सोम, 5 अक्टू॰Krishna DashamiPushya02:09+1d
शुक्र, 30 अक्टू॰Krishna PanchamiMrigashira19:26
गुरु, 5 नव॰Krishna EkadashiUttara Phalguni10:37

🎯 इस कार्य के लिए आपकी व्यक्तिगत तिथियाँ

अपनी राशि (चंद्र राशि) चुनें — हम आपके चंद्राष्टम के दिन हटाकर शेष को क्रम देते हैं। राशि नहीं पता? अपनी राशि और नक्षत्र जानें →

यह मुहूर्त कैसे निकाला जाता है

संस्कार अन्न के पहले स्वाद का उत्सव है, और इसकी नक्षत्र-सूची पोषकों पर टिकी है: सर्वोपरि पुष्य, साथ में रोहिणी, हस्त, श्रवण और उत्तरा-त्रय। मीठी खीर परंपरागत पहला ग्रास है — कई अंचलों में मामा के हाथ से। साथ चलने वाला प्रसिद्ध खेल — बच्चे के आगे पुस्तक, कलम, सिक्का, मिट्टी रखकर देखना कि नन्हा हाथ पहले क्या पकड़ता है — इसी संस्कार, इसी मुहूर्त-खिड़की का अंग है; उसे अच्छे चौघड़िया के रहते ही कर लें।

सामान्य निषेध यहाँ भी: रिक्ता तिथियाँ नहीं, भद्रा नहीं, ग्रहण-दिन का भोजन नहीं, और माता या शिशु के चंद्राष्टम पर नहीं (जन्म-कुंडली से शिशु की राशि पता हो तो वही लें, अन्यथा माता की)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अन्नप्राशन के लिए राशि किसकी देखें — शिशु की या माता-पिता की?

शिशु की, यदि जन्म-राशि ज्ञात है (जन्म के समय बनी कोई भी कुंडली उसे बताती है)। न पता हो तो परंपरा माता की राशि लेती है — संस्कार पूर्ण होने तक शिशु का चंद्रमा माता के चंद्रमा में समाया माना जाता है।

क्या अन्नप्राशन के लिए पूर्णिमा शुभ है?

हाँ — पहले पूर्ण आहार के लिए पूर्णता का प्रतीकवाद सुंदर माना गया है, और ग्रंथ इस संस्कार की मान्य तिथियों में पूर्णिमा को रखते हैं।

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