📚 बच्चे की पढ़ाई या पहले पाठ के लिए कौन सा दिन शुभ है?
Vidyarambha Muhurat • वास्तविक ग्रह-स्थितियों से गणना
बच्चे की विद्या का आरंभ बुधवार (बुध — बुद्धि), गुरुवार (गुरु — ज्ञान) या शुक्रवार को करें — अश्विनी, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, श्रवण या रेवती में। बसंत पंचमी — सरस्वती का अपना दिन — वर्ष की वह एक तारीख है जो हर दूसरे नियम से ऊपर है।
आगामी शुभ तिथियाँ (अगले 60 दिन)
सामान्य पंचांग के अनुसार — आपकी व्यक्तिगत परत से पहले। नीचे राशि चुनें, ताकि जो दिन विशेषतः आपके लिए अनुकूल नहीं हैं वे हट जाएँ।
| तारीख | तिथि | नक्षत्र | तिथि समाप्ति |
|---|---|---|---|
| शनि, 25 जुल॰ | Shukla Ekadashi | Jyeshtha | 11:36 |
| गुरु, 30 जुल॰ | Krishna Pratipada | Shravana | 21:32 |
| शनि, 8 अग॰ | Krishna Dashami | Rohini | 14:00 |
| शुक्र, 14 अग॰ | Shukla Dwitiya | Purva Phalguni | 18:48 |
| शनि, 15 अग॰ | Shukla Tritiya | Uttara Phalguni | 17:30 |
| सोम, 17 अग॰ | Shukla Panchami | Chitra | 17:01 |
| शनि, 22 अग॰ | Shukla Dashami | Jyeshtha | 02:02+1d |
| गुरु, 3 सित॰ | Krishna Saptami | Krittika | 02:27+1d |
🎯 इस कार्य के लिए आपकी व्यक्तिगत तिथियाँ
अपनी राशि (चंद्र राशि) चुनें — हम आपके चंद्राष्टम के दिन हटाकर शेष को क्रम देते हैं। राशि नहीं पता? अपनी राशि और नक्षत्र जानें →
यह मुहूर्त कैसे निकाला जाता है
विद्यारंभ परंपरा से पाँच वर्ष की आयु में (कुछ अंचलों में तीन) होता है — चावल भरी थाली में बच्चे का हाथ पकड़कर पहले अक्षर — प्रायः "ॐ" — लिखवाए जाते हैं। बुद्धि और ज्ञान — बुध और गुरु — इसके वारों के स्वामी हैं; "सुनने" का नक्षत्र श्रवण और "हाथ" का हस्त इसकी नक्षत्र-सूची में सबसे आगे।
बसंत पंचमी की स्थिति अनूठी है: विद्यारंभ के लिए वह अबूझ (बिना पूछे मान्य) मुहूर्त है — उस दिन आगे कोई पंचांग-जाँच नहीं चाहिए; इसीलिए भारत भर के विद्यालय-परिवार उसी दिन अक्षरारंभ कराते हैं। खिड़की में वह आए, तो वही लें। स्कूल की तय पहली तारीख कमज़ोर निकले तो संस्कार घर पर करें — थाली के पहले अक्षर पास के बली दिन, और स्कूल जब शुरू हो तब शुरू: विद्या थाली से आरंभ होती है, गेट से नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
स्कूल की एडमिशन-तारीख तय है, मुहूर्त कैसे लगाएँ?
संस्कार को काग़ज़ी कार्रवाई से अलग करें: विद्यारंभ (पहले अक्षर, सरस्वती वंदना) घर पर चुने शुभ दिन करें, स्कूल की तारीख़ को व्यवस्था मानें। पढ़ाई का आरंभ चावल की थाली पर होता है।
बसंत पंचमी को पंचांग-जाँच से छूट क्यों है?
वह सरस्वती का प्रकट-दिन माना गया है — विद्या और कला के हर कर्म का अबूझ मुहूर्त। उस दिन के पंचांग-दोष देवी की उपस्थिति से ढके माने जाते हैं।
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