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Vedic Astrology

🛕 तीर्थ यात्रा शुरू करने के लिए कौन सा दिन शुभ है?

Teerth Yatra Muhurat • वास्तविक ग्रह-स्थितियों से गणना

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तीर्थ यात्रा पुष्य, पुनर्वसु, श्रवण, अनुराधा या रेवती में आरंभ करें — सोमवार या गुरुवार श्रेष्ठ। सांसारिक यात्रा से उलट, यहाँ पवित्र तिथियाँ वरदान हैं: एकादशी या पूर्णिमा का प्रस्थान यात्रा का फल कई गुना कहा गया है। दक्षिण के धामों (रामेश्वरम आदि) के लिए पंचक का दक्षिण-नियम लागू रहता है।

आगामी शुभ तिथियाँ (अगले 60 दिन)

सामान्य पंचांग के अनुसार — आपकी व्यक्तिगत परत से पहले। नीचे राशि चुनें, ताकि जो दिन विशेषतः आपके लिए अनुकूल नहीं हैं वे हट जाएँ।

तारीखतिथिनक्षत्रतिथि समाप्ति
शनि, 25 जुल॰Shukla EkadashiJyeshtha11:36
सोम, 27 जुल॰Shukla TrayodashiMula16:16
गुरु, 30 जुल॰Krishna PratipadaShravana21:32
शुक्र, 31 जुल॰Krishna DwitiyaDhanishta22:33
शुक्र, 14 अग॰Shukla DwitiyaPurva Phalguni18:48
मंगल, 8 सित॰Krishna DwadashiPushya14:44
शुक्र, 18 सित॰Shukla SaptamiJyeshtha13:02
मंगल, 22 सित॰Shukla EkadashiUttara Ashadha21:45

🎯 इस कार्य के लिए आपकी व्यक्तिगत तिथियाँ

अपनी राशि (चंद्र राशि) चुनें — हम आपके चंद्राष्टम के दिन हटाकर शेष को क्रम देते हैं। राशि नहीं पता? अपनी राशि और नक्षत्र जानें →

यह मुहूर्त कैसे निकाला जाता है

तीर्थ सांसारिक नियम को एक जगह पलट देता है: जो तिथियाँ साधारण मुहूर्त व्रत-पूजन के लिए आरक्षित रखता है — एकादशी, पूर्णिमा — वे तीर्थ-प्रस्थान के लिए उत्तम हैं, क्योंकि यात्रा स्वयं पूजा है। पितृ-तीर्थों (गया आदि) के लिए अमावस्या का प्रस्थान भी स्वीकार्य है। चंद्रमा यात्री-मन के स्वामी हैं, इसलिए सोमवार का प्रस्थान प्रिय है — और आपका चंद्रबल यहाँ भी लागू: चंद्राष्टम का प्रस्थान पवित्र मार्ग को भी छूटे-संयोगों और चिड़चिड़ेपन से भर देता है।

पहाड़ी धामों (केदारनाथ, वैष्णो देवी) के लिए एक व्यावहारिक नियम जिसे पंचांग नहीं चाहिए: चढ़ाई दिन के पहले प्रहर में, सुबह के पहले शुभ चौघड़िया में शुरू करें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या एकादशी को तीर्थ यात्रा शुरू कर सकते हैं?

हाँ — बड़े शुभ भाव से। एकादशी विष्णु की तिथि है; उस दिन तीर्थ-प्रस्थान का पुण्य दुगना कहा जाता है। कई यात्री जान-बूझकर एकादशी को निकलते हैं और पूर्णिमा तक धाम पहुँचते हैं।

क्या दिशाशूल तीर्थ पर भी लगता है?

औपचारिक रूप से हाँ, पर पवित्र यात्रा के प्रति परंपरा कोमल है — वार की वस्तु खाकर निकलने का उपाय तीर्थ-प्रस्थान के लिए पूर्ण पर्याप्त माना जाता है।

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