🧳 यात्रा के लिए कौन सा दिन और कौन सी दिशा शुभ है?
Yatra Muhurat • वास्तविक ग्रह-स्थितियों से गणना
यात्रा चर या लघु नक्षत्र में करें — अश्विनी, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण या रेवती — अपने चंद्राष्टम के दिन और उस वार की दिशाशूल दिशा में नहीं: सोम-शनि को पूर्व, मंगल-बुध को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, रवि-शुक्र को पश्चिम।
आगामी शुभ तिथियाँ (अगले 60 दिन)
सामान्य पंचांग के अनुसार — आपकी व्यक्तिगत परत से पहले। नीचे राशि चुनें, ताकि जो दिन विशेषतः आपके लिए अनुकूल नहीं हैं वे हट जाएँ।
| तारीख | तिथि | नक्षत्र | तिथि समाप्ति |
|---|---|---|---|
| सोम, 26 अक्टू॰ | Shukla Purnima | Ashwini | 09:42 |
| शुक्र, 30 अक्टू॰ | Krishna Panchami | Mrigashira | 19:26 |
| रवि, 1 नव॰ | Krishna Saptami | Pushya | 14:53 |
| गुरु, 5 नव॰ | Krishna Ekadashi | Uttara Phalguni | 10:37 |
| सोम, 16 नव॰ | Shukla Saptami | Shravana | 04:21+1d |
| गुरु, 26 नव॰ | Krishna Dwitiya | Mrigashira | 13:16 |
| शुक्र, 4 दिस॰ | Krishna Ekadashi | Hasta | 23:46 |
| सोम, 14 दिस॰ | Shukla Panchami | Shravana | 19:17 |
🎯 इस कार्य के लिए आपकी व्यक्तिगत तिथियाँ
अपनी राशि (चंद्र राशि) चुनें — हम आपके चंद्राष्टम के दिन हटाकर शेष को क्रम देते हैं। राशि नहीं पता? अपनी राशि और नक्षत्र जानें →
यह मुहूर्त कैसे निकाला जाता है
यात्रा-मुहूर्त का एक नियम बाकी सबसे अलग है: दिशा। दिशाशूल — "काँटे की दिशा" — वार के साथ बदलती है, और उसी में प्रस्थान क्लासिक भूल है। दिशा टल न सके तो परंपरा का उपाय है: उस वार की निर्दिष्ट वस्तु खाकर निकलना (सोमवार को दही, बुधवार को गुड़, इत्यादि)। पंचक दूसरा दिशा-नियम जोड़ता है: पंचक के पाँच नक्षत्रों में दक्षिण की यात्रा विशेष रूप से वर्जित है।
लंबी या महत्वपूर्ण यात्रा में यात्री का चंद्रमा बली हो — अपने चंद्राष्टम में यात्रा कभी शुरू न करें: छूटी ट्रेनें, ग़लत मोड़, रास्ते के झगड़े उन्हीं दिनों जुटते हैं। लौटने के लिए परंपरा उदार है: अपने घर वापसी सदा शुभ है — ऊपर के नियम प्रस्थान पर लगते हैं। प्रस्थान शुभ या अमृत चौघड़िया में, राहु काल से बाहर, दाहिना पैर पहले।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिशाशूल क्या है और उसी दिशा में जाना पड़े तो?
हर वार की एक अशुभ यात्रा-दिशा (पूर्व सोम/शनि, उत्तर मंगल/बुध, दक्षिण गुरु, पश्चिम रवि/शुक्र)। अनिवार्य हो तो उस वार की निर्दिष्ट वस्तु खाकर निकलें — और राहु काल से बाहर, अच्छे चौघड़िया में प्रस्थान करें।
क्या घर लौटने पर भी नियम लगते हैं?
नहीं — यात्रा-मुहूर्त प्रस्थान का शासन करता है। अपने घर लौटना स्वयं में शुभ माना गया है; हाँ, लंबी ड्राइव अपने चंद्राष्टम में न रखना समझदारी है।
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