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Vedic Astrology

💎 रत्न पहली बार किस दिन धारण करूँ?

Shubh Muhurat for Wearing a Gemstone for the First Time • वास्तविक ग्रह-स्थितियों से गणना

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रत्न अपने ग्रह के वार और होरा में पहली बार धारण होता है: माणिक रविवार, मोती सोमवार, मूँगा मंगलवार, पन्ना बुधवार, पुखराज गुरुवार, हीरा शुक्रवार, नीलम शनिवार — रात भर कच्चे दूध या गंगाजल में रखकर, विहित धातु-अँगुली में, शुक्ल पक्ष में, अपने चंद्राष्टम से बचकर।

आगामी शुभ तिथियाँ (अगले 60 दिन)

सामान्य पंचांग के अनुसार — आपकी व्यक्तिगत परत से पहले। नीचे राशि चुनें, ताकि जो दिन विशेषतः आपके लिए अनुकूल नहीं हैं वे हट जाएँ।

तारीखतिथिनक्षत्रतिथि समाप्ति
शनि, 25 जुल॰Shukla EkadashiJyeshtha11:36
सोम, 27 जुल॰Shukla TrayodashiMula16:16
बुध, 29 जुल॰Shukla PurnimaUttara Ashadha20:06
बुध, 5 अग॰Krishna SaptamiAshwini20:43
शनि, 8 अग॰Krishna DashamiRohini14:00
शनि, 15 अग॰Shukla TritiyaUttara Phalguni17:30
सोम, 21 सित॰Shukla DashamiUttara Ashadha20:02
मंगल, 22 सित॰Shukla EkadashiUttara Ashadha21:45

🎯 इस कार्य के लिए आपकी व्यक्तिगत तिथियाँ

अपनी राशि (चंद्र राशि) चुनें — हम आपके चंद्राष्टम के दिन हटाकर शेष को क्रम देते हैं। राशि नहीं पता? अपनी राशि और नक्षत्र जानें →

यह मुहूर्त कैसे निकाला जाता है

रत्न-मुहूर्त ग्रह-विशिष्ट है, अतः सामान्य वार-नियम पीछे हट जाते हैं: हर रत्न का अपना वार, और उस वार में उस ग्रह की अपनी होरा (हमारे पंचांग पृष्ठ की होरा-सारणी देखें) सूक्ष्म खिड़की है — सूर्योदय के बाद की प्रातः होराएँ वरीय। तैयारी आधी विधि है: रत्न रात भर कच्चे दूध या गंगाजल में, भोर में देव-चरण या धूप से स्पर्श, और ग्रह के बीज-मंत्र के 108 जाप के साथ धारण; शुक्ल पक्ष और यथासंभव ग्रह का अपना नक्षत्र (मोती के चंद्र हेतु रोहिणी, पुखराज के गुरु हेतु पुष्य…) विधि पूर्ण करते हैं।

एक सावधानी छोटे अक्षरों में नहीं, यहीं चाहिए: रत्न नुस्खे हैं, फ़ैशन नहीं — ग़लत रत्न ग़लत ग्रह को बढ़ाता है। वही पहनें जो सक्षम ज्योतिषी ने आपकी कुंडली के लिए कहा हो; यह पृष्ठ धारण का समय बताता है, चयन नहीं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कौन सा रत्न किस अँगुली और धातु में?

मोटे तौर पर: माणिक सोने में अनामिका; मोती चाँदी में कनिष्ठा; मूँगा सोने/ताँबे में अनामिका; पन्ना सोने में कनिष्ठा; पुखराज सोने में तर्जनी; हीरा चाँदी/प्लैटिनम में मध्यमा-अनामिका; नीलम पंचधातु में मध्यमा। क्षेत्रीय विधियाँ भिन्न हैं — अपने ज्योतिषी का निर्देश मानें।

क्या किसी भी शुभ दिन रत्न पहन सकते हैं?

नहीं — रत्न का अपना वार नियम है (पुखराज गुरुवार, नीलम शनिवार, इत्यादि), होरा से और सूक्ष्म। सामान्य पंचांग दूसरे क्रम पर आता है; अपना चंद्राष्टम फिर भी ऊपर से टालना है।

Spiritual में और मुहूर्त

वर्ष की स्थिर सूचियाँ शुभ मुहूर्त 2026 पर, आज की घड़ियाँ चौघड़िया और राहु काल पर, और अपने शहर का पूरा पंचांग देखें।

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