💎 रत्न पहली बार किस दिन धारण करूँ?
Shubh Muhurat for Wearing a Gemstone for the First Time • वास्तविक ग्रह-स्थितियों से गणना
रत्न अपने ग्रह के वार और होरा में पहली बार धारण होता है: माणिक रविवार, मोती सोमवार, मूँगा मंगलवार, पन्ना बुधवार, पुखराज गुरुवार, हीरा शुक्रवार, नीलम शनिवार — रात भर कच्चे दूध या गंगाजल में रखकर, विहित धातु-अँगुली में, शुक्ल पक्ष में, अपने चंद्राष्टम से बचकर।
आगामी शुभ तिथियाँ (अगले 60 दिन)
सामान्य पंचांग के अनुसार — आपकी व्यक्तिगत परत से पहले। नीचे राशि चुनें, ताकि जो दिन विशेषतः आपके लिए अनुकूल नहीं हैं वे हट जाएँ।
| तारीख | तिथि | नक्षत्र | तिथि समाप्ति |
|---|---|---|---|
| मंगल, 8 सित॰ | Krishna Dwadashi | Pushya | 14:44 |
| बुध, 9 सित॰ | Krishna Trayodashi | Ashlesha | 12:32 |
| सोम, 21 सित॰ | Shukla Dashami | Uttara Ashadha | 20:02 |
| मंगल, 22 सित॰ | Shukla Ekadashi | Uttara Ashadha | 21:45 |
| गुरु, 1 अक्टू॰ | Krishna Panchami | Rohini | 12:36 |
| सोम, 5 अक्टू॰ | Krishna Dashami | Pushya | 02:09+1d |
| रवि, 1 नव॰ | Krishna Saptami | Pushya | 14:53 |
| गुरु, 5 नव॰ | Krishna Ekadashi | Uttara Phalguni | 10:37 |
🎯 इस कार्य के लिए आपकी व्यक्तिगत तिथियाँ
अपनी राशि (चंद्र राशि) चुनें — हम आपके चंद्राष्टम के दिन हटाकर शेष को क्रम देते हैं। राशि नहीं पता? अपनी राशि और नक्षत्र जानें →
यह मुहूर्त कैसे निकाला जाता है
रत्न-मुहूर्त ग्रह-विशिष्ट है, अतः सामान्य वार-नियम पीछे हट जाते हैं: हर रत्न का अपना वार, और उस वार में उस ग्रह की अपनी होरा (हमारे पंचांग पृष्ठ की होरा-सारणी देखें) सूक्ष्म खिड़की है — सूर्योदय के बाद की प्रातः होराएँ वरीय। तैयारी आधी विधि है: रत्न रात भर कच्चे दूध या गंगाजल में, भोर में देव-चरण या धूप से स्पर्श, और ग्रह के बीज-मंत्र के 108 जाप के साथ धारण; शुक्ल पक्ष और यथासंभव ग्रह का अपना नक्षत्र (मोती के चंद्र हेतु रोहिणी, पुखराज के गुरु हेतु पुष्य…) विधि पूर्ण करते हैं।
एक सावधानी छोटे अक्षरों में नहीं, यहीं चाहिए: रत्न नुस्खे हैं, फ़ैशन नहीं — ग़लत रत्न ग़लत ग्रह को बढ़ाता है। वही पहनें जो सक्षम ज्योतिषी ने आपकी कुंडली के लिए कहा हो; यह पृष्ठ धारण का समय बताता है, चयन नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कौन सा रत्न किस अँगुली और धातु में?
मोटे तौर पर: माणिक सोने में अनामिका; मोती चाँदी में कनिष्ठा; मूँगा सोने/ताँबे में अनामिका; पन्ना सोने में कनिष्ठा; पुखराज सोने में तर्जनी; हीरा चाँदी/प्लैटिनम में मध्यमा-अनामिका; नीलम पंचधातु में मध्यमा। क्षेत्रीय विधियाँ भिन्न हैं — अपने ज्योतिषी का निर्देश मानें।
क्या किसी भी शुभ दिन रत्न पहन सकते हैं?
नहीं — रत्न का अपना वार नियम है (पुखराज गुरुवार, नीलम शनिवार, इत्यादि), होरा से और सूक्ष्म। सामान्य पंचांग दूसरे क्रम पर आता है; अपना चंद्राष्टम फिर भी ऊपर से टालना है।
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